gopal agarwal

Just another weblog

106 Posts

2962 comments

gopalagarwal


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by:

दीर्घकालीन अलाभकारी फसल

Posted On: 21 Apr, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

में

1 Comment

R.O. से पानी लेते समय वाई प्रोडक्ट

Posted On: 21 Apr, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

में

1 Comment

The matter to ban 344 fixed dose combination

Posted On: 21 Apr, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

में

1 Comment

धर्म

Posted On: 21 Apr, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

में

1 Comment

पानी

Posted On: 21 Apr, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

में

1 Comment

पानी रे पानी

Posted On: 14 Apr, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

में

1 Comment

भाजपा के प्रति जनता का आक्रोश

Posted On: 7 Apr, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

में

373 Comments

कृषि व व्यापार के कष्ट दूर करने होंगे

Posted On: 3 Feb, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

में

365 Comments

कन्फयूजन

Posted On: 23 Jan, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

1 Comment

जन प्रतिनिधि व शिक्षा का सबंध

Posted On: 16 Dec, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

1 Comment

Page 2 of 11«12345»10...Last »

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा:

के द्वारा:

मैं जनसेवा को आपदा प्रबन्धन से जोड़कर भी देख रहा हूँ। पहाड़ो पर हुई तबाही कुदरती है या इंसानी छेड़छाड़ का नतीजा, परन्तु हिमालय की वादियों में तूफान तो आया ही था। संकट के इस समय आलोचना या समालोचना से उत्तम जन सेवा धर्म का प्रवर्तन है। व्यवस्था से जुड़ा होने के कारण यह राजनीति का एक भाग है। मैं स्पष्ट कर दूं कि राजनीति को लोग कपट, चाल या पैतरे बाजी समझ कर अज्ञानता के रसाताल में जा रहे हैं। राजनीति का सम्बन्ध उन नीतियों से है जो ‘राज’ के लिए आवश्यक है। इन नीतियों में भेद ही विभिन्न राजनीतिक दलों का गठन कराता है। यह एक स्वस्थ्य परम्परा है। स्वन्त्रता से पूर्व कांग्रेस पार्टी ‘सेवा दल’ की भूमिका में रही। जब-जब आपदा आती कार्यकर्ता आपदा प्रबन्ध में लग जाते। महामारी, हैजा, प्लेग में बापू तक की परमार्थ सेवा में एक कार्यकर्ता के रूप में सेवा करने के उदाहरण हैं। सटीक लेखन

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat




latest from jagran