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धर्म

Posted On 21 Apr, 2016 में

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“यदि कोई व्यक्ति यह समझता है कि वह दूसरे धर्मों का विनाश कर अपने धर्म की विजय कर लेगा, तो बन्धुओं, उसकी यह आशा कभी भी पूरी नहीं होने वाली। सभी धर्म हमारे अपने हैं, इस भाव से उन्हें अपनाकर ही हम अपना और सम्पूर्ण मानवजाति का विकास कर पायेंगे। यदि भविष्य में कोई ऐसा धर्म उत्पन्न हुआ जिसे सम्पूर्ण विश्व का धर्म कहा जाएगा तो वह अनन्त और निर्बाध होगा। वह धर्म न तो हिन्दू होगा, न मुसलमान, न बौद्ध, न ईसाई अपितु वह इन सबके मिलन और सामंजस्य से पैदा होगा।” स्वामी विवेकानन्द

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Lark के द्वारा
May 7, 2016

Co28;#to30&The old Klingon War Bride is probably checking to see if there is room on the mountain for “you know who”. Oh well, if not, they can always just put it over the top of Washington.


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