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भूमि अधिग्रहण के कुतर्क

Posted On: 20 Apr, 2015 Others में

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स्वामी कल्यान देव के नाम को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। मुजफफरनगर के शुक्रताल के आश्रम से गांव गांव स्कूल खुलवा दिए। किसी वैधानिक शक्ति से उन्होंने विद्यालयों के लिए जमीन नहीं ली। बस उचित प्रबंधन व्यवस्था के लिए स्थानीय लोगों में समझ जरूर पैदा कर दी। विनोबा भावे का भूदान आन्दोलन चला। उनके गैर सरकारी कार्यक्रम को समझने या राजनीति के तहत जैसे भी हो श्री गोलबालकर ने भैंट की तथा उन्होंने विनोबा जी के कार्य की प्रंशसा की।
परन्तु नितिन गड़करी जी ने किसानों की भूमि अधिगृहण पर गांवों में स्कूल खोलने की मंशा जताई। उनकी मंशा पर शंका उठनी स्वाभाविक है। सरकारी स्कूलों के खंडहरी चरित्र से सभी वाकिफ है। नितिन गडकरी स्कूल ही खोलना चाहते हैं तो पहले खुले स्कूलों का ढॉचा ठीक कर पढ़ाई की समुचित व्यवस्था, फर्नीचर, मास्टर जी का बराबर आना ठीक करवा दें। केन्द्र गांव में स्कूल खुलवायेगा तो भवन निर्माण का बजट भी देगा। पहले वर्तमान व्यवस्था को दुरूस्त करते चलें। फिर भी जहॉ नये स्कूल बनाने है उन स्थानों को पहले चिन्हित कर घोषित कर दें। उद्देश्य निश्चित हो तो रास्ता निकल ही आता है।
परन्तु ऐसा नहीं है। एक बार अधिग्रहण विधि स्थापित हो जाय तो उद्देश्य गौण हो जाता है। एक चैनल पर साक्षात्कार में भाजपा नेता श्री शाहनवाज खां कह रहे थे कि गुजरात में जो भी जमीन दी गयी नियमों के अनुसार ही दी गयी। साक्षात्कार कर्त्ता अड़ानी ग्रुप को जमीन देने की बात पूछ रहे थे।
कानून बन जाने की बाद यह तथ्य गौण हो जायेगा कि बनाने से पूर्व मौखिक वायदा था कि पूंजीपत्तियों को जमीन नहीं दी जायेगी। मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री कह रहे थे कि मुबंई की स्लम की जगह मकान बनाने के लिए जमीन चाहिए। शंका तो ऐसी बातों से बढ़ जाती है। मुबंई की स्लम बस्ती वाले दूर गांव जंगल में रहने तो जायेंगे नहीं, स्लम तो वहॉ मजदूरी ढूंढ रहे लोगों के मजदूरी स्थल के पास निवास की नियत से बनते हैं।
इस मामले में अच्छा तो यही रहेगा कि कार्य चिन्हित व स्थान का चयन कर निर्धारित परिधि में जमीन तलासें। जरूरी होगा तो भू-स्वामी अपनी जगह बेच सकते है। ऐसे मौके पर भी प्राथमिकता बंजर भूमि की रहे। जंगल उजाड़ कर पर्यावरण संतुलन खराब कर तथा परम्पारिक उद्यम को नष्टा कर जमीन लेना प्राकृतिक रूप से अन्याय है। जमीने पहले भी ली गयी है। 200 मीटर चौड़ी सड़क बनाने के लिए 2000 मीटर चोड़ी पट्टी ली गयी। अवशेष जगह पर करोड़ी फलेट बना कर मुनुफा लूटा गया।
थोड़ी अड़चन विपक्षी पार्टीयों के बयानूं में भी है। वे अपनी बात को खण्डित रूप से पृथक पृथक स्तर से कहलाने के बजाय लोक सभा चुनाव के समय भाजपा के प्रधानमंत्री नामित नेता के भाषणों के टेप चलवा भर दें। उनके आसमानी उड़ान के वायदों को याद कर जनता पांच वर्ष तक इन्तजार नहीं कर पायेगी।

गोपाल अग्रवाल

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2 प्रतिक्रिया

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Seston के द्वारा
May 7, 2016

He sure is cute! I have a little 9 month old Border Collie/Blue Heeler mix that I rescued about 6 weeks ago, and I have to say, he is such a joy! Wish I could have witnessed the baby pupsyneps… but he sure is fun none the less!I think Turbo is going to be one handsome guy — he sure is one cute puppy!

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
April 20, 2015

सार्थक आलेख हेतु आभार


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