gopal agarwal

Just another weblog

106 Posts

2962 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 4631 postid : 592620

कारोबारियों के स्वाभिमान का तिलक

Posted On: 4 Sep, 2013 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

राजनैतिक रूप से ताकतवर वर्ग सदैव समाज का रक्त शोषण करने के बाद भी गले लगाये जाते है। वहीं राजनीतिक चैतना विहीन व्यक्ति या ईमानदार होने के बावजूद तिरस्कृत रहते हैं। सम्भवत यह राजनैतिक व्यवस्था की मजबूरी है। कांग्रेस का एक दौर रहा था जब अफसरों के नज़दीक रहने वाले नेताओं को भ्रष्ट त्रिकोण बनाकर लाभ एवं यश कमाते थे जबकि साधारण और ईमानदार कारोबारी चपरासी से लेकर कलैक्टर तक और विभिन्न कर निर्धारण अधिकारियों के सम्मुख याचक की मुद्रा में खड़े रहते थे। इस उत्पीड़न ने नई पीढ़ी के कारोबारियों को झकझोरा, जिसके कारण कई कोनों से असन्तोष व आन्दोलन की गर्मी महसूस होने लगी। इस असन्तोष को सबसे पहले श्री मुलायम सिंह यादव ने समझा। इससे पहले भारतीय जनता पार्टी असन्तोष की चिंगारियों में घी डालती रही। देश की मतदाता शक्ति का 14 प्रतिशत अंश रखने वाले छोटे कारोबारियों की समस्या को सुलझाने के लिए श्री मुलायम सिंह यादव ने भ्रष्ट त्रिकोण भुजाऐं तोड़ दी। कदाचित श्री मुलायम सिंह यादव के निर्णय से लाभार्थी बना निम्न मध्यवर्गीय कारोबारी कोई अपेक्षा नहीं थी। वास्तिविकता तो ये है कि राजनैतिक परख रखने वाले विद्वानों ने यही कहा है कि राष्टª dsके अन्दर कुछ नया करने का साहस किसी राष्टीय नेता में है तो वे श्री मुलायम सिंह यादव ही है। उत्तर प्रदेश के कारोबारी सौभाग्यशाली है जिनका कलंक पोंछकर श्री मुलायम सिंह यादव ने स्वाभिमान का तिलक अपने हाथों से किया।
यह आश्चर्यजनक सत्य है कि तत्कालीन व्यापारी नेतृत्व तीन भागों में बंटा हुआ था। एक वे जो ईमानदारी से समस्या का हल चाहते थे। दूसरे भाग में वे थे जो इस बात के लिए गोलबन्द हो चुके थे कि समस्या का समाधान भारतीय जनता पार्टी के हाथों से हो। वे कुटिलता के प्रति अनभिज्ञ थे। तीसरे भाग में वे नेता थे जो कि समस्या न रहने से उनकी नेतागिरी का दुकान बंद हो जायेगी। आज तीसरे भाग वाले नेता कटी पतंग की तरह डोल रहे हैं। दूसरे भाग के लोगों को भाजपा की चाल समझ में आने लगी और वे धीरे-धीरे प्रथम भाग के व्यक्तियों के साथ खड़े हो रहे हैं। अफसोस है कि खीझ खाया हुआ और ईर्ष्या की भावना से ग्रस्त भाजपा का नेतृत्व हरे भरे लहराते खेतों को भी चीख-चीख कर कटिला झाड़ बता रहा है। यदि राजनीति ईमानदारी से हो तो उसके दूरगामी परिणाम निकलते हैं। समाजवादी पार्टी के वर्तमान व पिछले शासन के कार्यकालों में यह स्पष्ट देखा जा सकता है। जब न तो मूल्य बढ़े, ना काला बाज़ारी हुई और राजस्व भी बिना चौकसी और दबाव के सर्वाधिक वृद्धि के साथ बढ़ा। इंस्पैक्टर तंत्र से मुक्ति दिलाने के बाद उद्योग एवं वितरण के क्षेत्र में यह स्वर्णिम कार्यकाल माने जाते है। आगामी लोक सभा चुनावों को मद्देनज़र रखते हुए भारतीय जनता पार्टी अर्नगल प्रचार व आरोपों के साथ सरकार को कोस कर प्रलोभित करने वाले सपने दिखाएगी। कारोबारी यह तय कर ले कि वे तमाशबीन नहीं है। उन्हें भी सत्ता की भागीदारी चाहिए। ये तभी मिल सकेगी जब राजनैतिक चेतना जाग्रित हो और राजनीति में हमें दोस्त और दुश्मन पहचानने की समझ हो। जिस पार्टी ने हमारे स्वाभिमान को वापस दिलाया और सम्मान से रहना सिखाया, वही पार्टी कारोबारियों के मतों को प्राप्त करने का अधिकार रखती है। लोक सभा चुनाव परीक्षा की घड़ी है और उस समय व्यापारी वर्ग पूरी शक्ति से समाजवादी पार्टी के पक्ष मे उतरेगा। पदोन्नति में आरक्षण की समाप्ति तथा खुदरा व्यापार में विदेशी पूंजी के निवेश में प्रतिबन्ध के निर्णय से कारोबारियों का विश्वास और पुख्ता हुआ है।

गोपाल अग्रवाल

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran