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मशीन में ऐसा क्या है?

Posted On: 8 Apr, 2017  
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उदर विकार पर चेहरे की सर्जरी

Posted On: 14 Jul, 2016  
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मंहगाई व ब्याज दरों की समीक्षा

Posted On: 8 Jun, 2016  
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प्रान्तीय सत्ता क्षेत्रीय दलों के पास

Posted On: 28 May, 2016  
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असफलता से सफलता की ओर

Posted On: 16 May, 2016  
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पानी के लिए जन अभियान की आवश्यकता

Posted On: 28 Apr, 2016  
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दीर्घकालीन अलाभकारी फसल

Posted On: 21 Apr, 2016  
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R.O. से पानी लेते समय वाई प्रोडक्ट

Posted On: 21 Apr, 2016  
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The matter to ban 344 fixed dose combination

Posted On: 21 Apr, 2016  
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धर्म

Posted On: 21 Apr, 2016  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

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के द्वारा:

मैं जनसेवा को आपदा प्रबन्धन से जोड़कर भी देख रहा हूँ। पहाड़ो पर हुई तबाही कुदरती है या इंसानी छेड़छाड़ का नतीजा, परन्तु हिमालय की वादियों में तूफान तो आया ही था। संकट के इस समय आलोचना या समालोचना से उत्तम जन सेवा धर्म का प्रवर्तन है। व्यवस्था से जुड़ा होने के कारण यह राजनीति का एक भाग है। मैं स्पष्ट कर दूं कि राजनीति को लोग कपट, चाल या पैतरे बाजी समझ कर अज्ञानता के रसाताल में जा रहे हैं। राजनीति का सम्बन्ध उन नीतियों से है जो ‘राज’ के लिए आवश्यक है। इन नीतियों में भेद ही विभिन्न राजनीतिक दलों का गठन कराता है। यह एक स्वस्थ्य परम्परा है। स्वन्त्रता से पूर्व कांग्रेस पार्टी ‘सेवा दल’ की भूमिका में रही। जब-जब आपदा आती कार्यकर्ता आपदा प्रबन्ध में लग जाते। महामारी, हैजा, प्लेग में बापू तक की परमार्थ सेवा में एक कार्यकर्ता के रूप में सेवा करने के उदाहरण हैं। सटीक लेखन

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat




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